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रावघाट खदान में BSP प्रबंधन के खिलाफ आर-पार की लड़ाई का ऐलान, ₹707 की दर पर आखिर कैसे चलेंगी गाड़ियां?

₹910 प्रति टन परिवहन दर की मांग पर अड़े स्थानीय वाहन मालिक और श्रमिक, 17 अक्टूबर तक समाधान नहीं हुआ तो अनिश्चितकालीन चक्काजाम और खदान बंदी की चेतावनी

नारायणपुर/खोड़गांव। रावघाट खदान से लौह अयस्क परिवहन करने वाले स्थानीय वाहन मालिकों, श्रमिकों और बेरोजगार युवाओं का आक्रोश अब खुलकर सामने आने लगा है। परिवहन दर में बढ़ोतरी किए बिना नई टेंडर प्रक्रिया आगे बढ़ाए जाने से नाराज स्थानीय लोगों ने भिलाई इस्पात संयंत्र (BSP) प्रबंधन को सीधे निशाने पर लेते हुए आंदोलन का बिगुल फूंक दिया है। सवाल केवल परिवहन दर का नहीं, बल्कि उन स्थानीय लोगों की रोजी-रोटी और आर्थिक भविष्य का भी है, जो रावघाट खदान से जुड़े परिवहन कार्य के भरोसे अपनी आजीविका चला रहे हैं। बूढ़ादेव अंजरेल माइंस श्रमिक विकास समिति और उससे संबद्ध यूनियनों ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि उनकी मांगों पर समय रहते निर्णय नहीं लिया गया, तो खदान क्षेत्र में परिवहन व्यवस्था ठप करने के साथ अनिश्चितकालीन चक्काजाम और खदान बंदी जैसा कदम उठाया जा सकता है। 13 अक्टूबर 2026 को खोड़गांव के मिनी स्टेडियम में आयोजित संयुक्त आपातकालीन बैठक में समिति और यूनियनों ने सर्वसम्मति से आंदोलन का निर्णय लिया। इसके बाद कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी, नारायणपुर और रावघाट परियोजना के महाप्रबंधक को ज्ञापन सौंपकर वर्तमान परिवहन दर में वृद्धि की मांग की गई। समिति के अनुसार, नारायणपुर से अंतागढ़ रेलवे रैक प्वाइंट तक लौह अयस्क परिवहन के लिए वर्तमान में ₹707 प्रति टन की दर मिल रही है, जिसे मौजूदा परिचालन खर्चों के मुकाबले अपर्याप्त बताया जा रहा है। समिति की मांग है कि नई निविदा प्रक्रिया में इस दर को बढ़ाकर ₹910 प्रति टन किया जाए। यानी परिवहन दर में ₹203 प्रति टन की वृद्धि की मांग की जा रही है।

सवाल BSP प्रबंधन से: बढ़ती लागत के बीच पुरानी दर पर कैसे चलेगा परिवहन?

स्थानीय वाहन मालिकों की परेशानी का हवाला देते हुए समिति ने कहा है कि रावघाट क्षेत्र की खराब सड़कों के कारण वाहनों में टूट-फूट बढ़ रही है। वहीं डीजल, टायर और स्पेयर पार्ट्स की कीमतों में वृद्धि से परिवहन की लागत लगातार बढ़ रही है। ऐसी स्थिति में ₹707 प्रति टन की दर पर काम करना वाहन मालिकों के लिए घाटे का सौदा बनता जा रहा है। समिति का दावा है कि कई वाहन मालिकों के लिए बैंक और वित्तीय संस्थानों से लिए गए वाहनों की मासिक किस्त चुकाना भी मुश्किल हो गया है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल BSP प्रबंधन की भूमिका को लेकर उठ रहा है कि जब स्थानीय वाहन मालिक बढ़ती लागत और आर्थिक दबाव की समस्या उठा रहे हैं, तो नई टेंडर प्रक्रिया में उनकी मांगों पर क्या विचार किया जा रहा है? हालांकि, इस मामले में BSP प्रबंधन का पक्ष और दर निर्धारण के आधार उपलब्ध नहीं हैं। समिति ने परिवहन दर को ₹910 प्रति टन करने की मांग को स्थानीय वाहन मालिकों, श्रमिकों और बेरोजगार युवाओं के आर्थिक हितों से जुड़ा मुद्दा बताया है। ज्ञापन में उल्लेख किया गया है कि मौजूदा निविदा प्रक्रिया की समय सीमा 17 अक्टूबर 2026 तक निर्धारित है। इसी समयसीमा को ध्यान में रखते हुए समिति ने प्रबंधन और प्रशासन से तत्काल निर्णय लेने की मांग की है। समिति का कहना है कि समय रहते समाधान नहीं निकला, तो स्थानीय स्तर पर रोजगार और परिवहन से जुड़े आर्थिक हितों पर गंभीर असर पड़ सकता है।

17 अक्टूबर के बाद आंदोलन तेज करने की चेतावनी

बूढ़ादेव अंजरेल माइंस श्रमिक विकास समिति ने चेतावनी दी है कि मांग पूरी नहीं होने पर रावघाट खदान क्षेत्र में परिवहन कार्य बंद कर अनिश्चितकालीन आंदोलन शुरू किया जाएगा। समिति ने यह भी कहा है कि आंदोलन के दौरान बाहरी वाहनों और अन्य ठेकेदारों के वाहनों को खदान क्षेत्र में प्रवेश नहीं करने दिया जाएगा। आर्थिक नुकसान से परेशान वाहन मालिकों द्वारा अपनी गाड़ियां फाइनेंस कंपनियों को सरेंडर करने की चेतावनी भी दी गई है। समिति के अध्यक्ष संतु राम उसेंडी ने कहा है कि यदि मांगों की अनदेखी के कारण औद्योगिक शांति प्रभावित होती है, कोई अप्रिय स्थिति बनती है या भिलाई इस्पात संयंत्र का उत्पादन बाधित होता है, तो इसकी जिम्मेदारी BSP प्रबंधन और जिला प्रशासन की होगी। रावघाट खदान से जुड़ा यह विवाद अब केवल परिवहन दर तक सीमित नहीं रह गया है। एक ओर स्थानीय वाहन मालिक बढ़ती परिचालन लागत के बीच दर में संशोधन की मांग कर रहे हैं, तो दूसरी ओर नई टेंडर प्रक्रिया की समयसीमा नजदीक है। ऐसे में BSP प्रबंधन के सामने स्थानीय हितों और खदान से जुड़े परिवहन कार्य को लेकर उठ रहे सवालों का जवाब देने की चुनौती है। फिलहाल समिति ने अपना रुख स्पष्ट कर दिया है। अब देखना होगा कि 17 अक्टूबर की समयसीमा तक प्रबंधन इस मांग पर कोई ठोस पहल करता है या रावघाट खदान क्षेत्र में आंदोलन और परिवहन ठप होने की आशंका और गहरा जाती है।

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