नारायणपुर से 35 किलोमीटर दूर धौडाई गांव में नवरात्रि का उत्साह, दुर्गा उत्सव समिति के आयोजन में ग्रामीण गरबे की थाप पर कर रहे नृत्य, 17 अक्टूबर को होगा भव्य जागरण
छत्तीसगढ़ के बस्तर अंचल में बदलाव की एक सुखद तस्वीर नारायणपुर जिले के धौडाई गांव में देखने को मिल रही है। जिस गांव में कभी नक्सलवाद के प्रभाव और नक्सलियों की दहशत के चलते शाम होते ही सन्नाटा पसर जाता था, वहां आज नवरात्रि के पावन अवसर पर माता के जयकारों और गरबे की धुन से माहौल भक्तिमय हो उठा है। दुर्गा उत्सव धौडाई समिति के तत्वावधान में आयोजित गरबा महोत्सव में ग्रामीण पूरे उत्साह के साथ शामिल हो रहे हैं। गांव के मैदान में देर रात तक गरबे की थाप पर थिरकते ग्रामीणों के चेहरे पर उमंग, उल्लास और अपनेपन की झलक दिखाई दे रही है। यह आयोजन केवल नवरात्रि उत्सव तक सीमित नहीं है, बल्कि ग्रामीणों के लिए खुलकर अपनी आस्था, संस्कृति और सामूहिक खुशियों को जीने का एक खास अवसर भी बन गया है।
धौडाई नारायणपुर जिला मुख्यालय से करीब 35 किलोमीटर दूर स्थित एक गांव है। ग्रामीणों के अनुसार, कुछ समय पहले तक यहां नक्सलवाद के प्रभाव और भय का माहौल ऐसा था कि शाम करीब सात बजे के बाद गांव की गलियों और सार्वजनिक स्थानों पर सन्नाटा छा जाता था। ऐसे वातावरण में रात के समय बड़े धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित करना आसान नहीं था। लेकिन अब नवरात्रि के दौरान गांव में उत्सव का माहौल नजर आ रहा है। माता की भक्ति में डूबे ग्रामीण गरबा महोत्सव में बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रहे हैं और सामूहिक रूप से त्योहार मना रहे हैं। जिस तरह के आयोजन ग्रामीण पहले टेलीविजन पर देखा करते थे, आज उसी तरह की रौनक उन्हें अपने गांव के मैदान में देखने को मिल रही है।
दुर्गा उत्सव धौडाई समिति के इस आयोजन में सरपंच और ग्रामीणों का सहयोग भी मिल रहा है। गांव के लोग एकजुट होकर कार्यक्रम को सफल बनाने में जुटे हैं। गरबे की धुन पर महिला-पुरुष और अन्य ग्रामीण उत्साह के साथ नृत्य कर रहे हैं। नवरात्रि के अवसर पर मंदिरों में उमड़ रही श्रद्धालुओं की भीड़ के बीच धौडाई में आयोजित यह गरबा महोत्सव भी क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है। ग्रामीणों के लिए यह पल इसलिए भी खास है, क्योंकि लंबे समय तक भय के माहौल में सीमित रही सार्वजनिक गतिविधियों के बीच अब वे अपने गांव में उत्सव और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आनंद ले पा रहे हैं। ग्रामीण इस बदलाव को अपने जीवन के यादगार पलों में से एक मान रहे हैं। उनके लिए गरबा महोत्सव सिर्फ नृत्य और मनोरंजन नहीं, बल्कि एक साथ जुटने, खुशियां साझा करने और अपनी परंपराओं को जीवंत रखने का अवसर है। गांव में देर रात तक गूंजते माता के जयकारे और गरबे की थाप लोगों के उत्साह को और बढ़ा रहे हैं। ग्रामीणों की खुशी इस बात से भी झलकती है कि जिस तरह के भव्य आयोजनों की कल्पना वे कभी दूर से किया करते थे, आज वे अपने ही गांव में बिना पहले जैसी दहशत के माहौल में उनका हिस्सा बन रहे हैं।
इसी कड़ी में 17 अक्टूबर को धौडाई गांव में भव्य जागरण का आयोजन भी रखा गया है। आयोजकों और ग्रामीणों को उम्मीद है कि इसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होंगे। नवरात्रि के इस पावन अवसर पर गरबा महोत्सव और जागरण की तैयारियां गांव में उत्साह का माहौल बना रही हैं। धौडाई में दिखाई दे रही यह तस्वीर बताती है कि धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक गतिविधियां ग्रामीण जीवन में नई ऊर्जा भर सकती हैं। एक छोटे से गांव में सामूहिक सहयोग से हो रहा यह आयोजन ग्रामीणों की खुशी, एकजुटता और सामान्य जनजीवन में आए सकारात्मक बदलाव की सुखद झलक पेश कर रहा है।











